भोपाल, मध्य प्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए राज्य सरकार व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत 500
से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा एवं सामाजिक न्याय विभाग के प्रतिनिधियों के साथ पुलिस की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। यह निर्णय गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी (NCORD) बैठक में लिया गया। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबंधित विभागों को तीन वर्षीय विशेष अभियान के लिए लक्ष्य निर्धारित कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य
सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए संबंधित विभागों को समन्वित और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर भी प्रभावी प्रहार किया जाए।उन्होंने सूचना तंत्र मजबूत करने तथा नार्कोटिक्स वर्टिकल, विशेष शाखा (एसआईबी) और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया।
बैठक
में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में वर्ष 2025
के दौरान अफीम, मॉर्फीन, कोडीन सहित अन्य मादक पदार्थों के 2,073
प्रकरणों में कुल 1,44,025
किलोग्राम पदार्थ नष्ट किए गए। वहीं, वर्ष 2026
में 30 सितंबर तक 2,756
प्रकरणों में 1,30,380
किलोग्राम मादक पदार्थों का विनष्टीकरण किया गया।इस प्रकार, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दोनों वर्षों में कुल 2,74,405
किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए। बैठक में विनष्टीकरण की कार्रवाई में प्रदेश के देश में पहले स्थान पर रहने की जानकारी भी दी गई।इसके अलावा, 30 सितंबर 2026
तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 2,986
मामलों में 4,091
आरोपियों से कुल 50,933
किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए जाने की जानकारी साझा की गई।
स्कूल-कॉलेजों में चलेगा नशामुक्ति जागरूकता अभियान
राज्य
सरकार शासकीय और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने पर जोर दे रही है। मुख्य सचिव ने 500
से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित करने और विद्यार्थियों व शिक्षकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। समितियों के लिए स्थानीय पुलिस थाने के बीट प्रभारी को नोडल अधिकारी बनाए जाने की बात कही गई। साथ ही, नशे से संबंधित सूचनाएं देने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की पहचान गोपनीय रखने के लिए व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए। मादक पदार्थों से संबंधित जानकारी देने के लिए नार्कोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 और 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 811 शिकायतें प्राप्त हुईं। इस अवधि में मध्य प्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मादक पदार्थों के निर्माण से जुड़ी 18 अवैध गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया। अधिकारियों के अनुसार, नशे के अवैध कारोबार से संबंधित सूचनाएं प्राप्त करने के लिए मानस पोर्टल और हेल्पलाइन व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है।
बैठक में अवैध मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े आरोपियों की संपत्ति के विरुद्ध की गई कार्रवाई का ब्योरा भी प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार, वर्ष 2025
में एनडीपीएस के 54
मामलों में 300
करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026
में 38 मामलों में 146
करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की गई। इस तरह कुल 92
मामलों में 446
करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच किए जाने की जानकारी दी गई।सितंबर 2026
तक एनडीपीएस के 201
विशेष विचारण मामलों की निगरानी किए जाने की बात भी बैठक में सामने आई। इसी अवधि में लंबित मामलों में से आठ में दोषसिद्धि होने की जानकारी दी गई।
मुख्य सचिव ने औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों के दुरुपयोग और उनके अवैध कारोबार में इस्तेमाल की आशंका को रोकने के लिए उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को संयुक्त कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों और संबंधित एसोसिएशनों की सूची साझा करने, निगरानी तंत्र मजबूत करने तथा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने को कहा। कोडीनयुक्त कफ सिरप जैसी दवाओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण पर लगातार निगरानी रखने तथा लाइसेंस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए।इसके साथ ही, फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) में एनडीपीएस अधिनियम के तहत भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट 15
दिनों के भीतर प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, प्रदेश में मादक पदार्थों के सेवन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कुल 30,339
कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 2.58
करोड़ लोगों की सहभागिता रही। नशे से दूरी है जरूरी अभियान के तहत सोशल मीडिया पर 58
करोड़ से अधिक व्यूज मिलने की जानकारी भी दी गई।
इसके अलावा, लगभग 10
हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ने की बात सामने आई।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने, सूचना तंत्र को मजबूत करने और नशामुक्ति संबंधी सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश दिए। सामाजिक न्याय विभाग को उन जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया, जहां फिलहाल ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31
और स्वास्थ्य विभाग के 10
नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं।
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