शराब, महंगी शिक्षा और बेरोजगारी: आखिर कब होगा समाधान?

आज हमारे देश में एक अजीब विडंबना देखने को मिलती है। लगभग हर मोहल्ले में शराब की दुकान आसानी से मिल जाती है, वहीं कई जगहों पर अवैध शराब का कारोबार भी खुलेआम चल रहा है। ऐसा लगता है मानो शराब लोगों तक पहुँचाने की व्यवस्था शिक्षा और रोजगार से भी अधिक मजबूत हो गई हो।

इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव युवा वर्ग पर पड़ रहा है। नशे की लत में फँसकर अनेक युवा अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। नशे के कारण झगड़े, अपराध, लूटपाट, सड़क दुर्घटनाएँ और सामाजिक असुरक्षा बढ़ रही है। परिवार टूट रहे हैं और समाज में अशांति फैल रही है।

दूसरी ओर शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए कर्ज लेने तक को मजबूर हैं। उच्च शिक्षा आम आदमी की पहुँच से दूर होती जा रही है। शिक्षा, जो किसी भी देश के विकास की नींव होती है, वही आज अनेक लोगों के लिए एक बोझ बनती जा रही है।

बेरोजगारी की समस्या भी दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। लाखों पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। जब युवाओं को शिक्षा के बाद रोजगार नहीं मिलता, तो उनमें निराशा और असंतोष बढ़ता है। ऐसे में कुछ लोग गलत रास्तों की ओर भी मुड़ जाते हैं, जिसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।

जनता चाहती है कि शासन और प्रशासन शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नशामुक्ति और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों पर अधिक ध्यान दें। समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब युवाओं को अच्छी शिक्षा, रोजगार के अवसर और नशामुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

आवश्यकता इस बात की है कि हम समाज को कमजोर करने वाली समस्याओं पर गंभीरता से विचार करें और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाएँ। एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण केवल नारों से नहीं, बल्कि शिक्षित, स्वस्थ और रोजगारयुक्त युवाओं से होता है।

– जितेंद्र मेहरा


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