अंतरराष्ट्रीय खेल में भारतीय महिला फुटबॉल टीम की स्ट्राइकर ज्योति चौहान एक छोटे से टीन के शेड वाले मकान में रहने को मजबूर है...।
ज्योति चौहान जब मैदान पर उतरती हैं तो विरोधी टीम की डिफेंस लाइन कांप उठती है। भारतीय जर्सी पहनकर उनका हर गोल देश के करोड़ों लोगों का सिर गर्व से ऊंचा कर देता है, लेकिन मैदान के बाहर उनकी जिंदगी संघर्ष, अभाव और सरकारी बेरुखी की ऐसी कहानी बयां करती है, जो खेल व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। झाबुआ जिले में इन दिनों आयोजित राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टूर्नामेंट में अपना दमखम दिखा रहीं भारतीय महिला फुटबॉल टीम की स्ट्राइकर ज्योति चौहान आज भी एक सुरक्षित छत और बेहतर जीवन की बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीत दिलाने वाली यह खिलाड़ी झाबुआ जिले के सरदारपुर में सरकारी जमीन पर बने एक छोटे से टीन शेड के मकान में परिवार के साथ रहने को मजबूर है।
