नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने NTA से सवाल किया कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) देशभर में बड़े स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है, लेकिन वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि NTA को UPSC से सीखने की जरूरत है।केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं NEET पेपर लीक मामले की जांच पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की चूक न हो। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है और आगामी री-एग्जाम के लिए नया सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है।
सुप्रीम
कोर्ट
ने
शिक्षा
मंत्रालय
से
NEET-UG
परीक्षाओं
की
जांच
प्रक्रिया
का
पूरा
ब्योरा
मांगा।
कोर्ट
ने
यह
भी
पूछा
कि
हाई
पावर
मॉनिटरिंग
कमेटी
की
सिफारिशों
के
बावजूद
इस
बार
फिर
पेपर
लीक
जैसी
घटना
कैसे
हुई।हाई
पावर
कमेटी
के
प्रमुख
एवं
पूर्व
ISRO
प्रमुख
डॉ.
के.
राधाकृष्णन
ने
कोर्ट
को
बताया
कि
समिति
की
अधिकांश
सिफारिशें
लागू
कर
दी
गई
हैं।
उन्होंने
कहा
कि
NEET-PG
2025 परीक्षा सफलतापूर्वक
आयोजित
हुई
और
आगामी
री-टेस्ट
से
पहले
सुरक्षा
में
रही
कमजोरियों
को
दूर
किया
जा
रहा
है।सुनवाई
के
दौरान
कोर्ट
ने
कहा
कि
NTA
अभी
एक
मजबूत
और
स्थायी
संस्था
की
तरह
काम
नहीं
कर
रही
है।
सुप्रीम
कोर्ट
ने
सुझाव
दिया
कि
NTA
को
IIT
और
अन्य
बड़े
संस्थानों
के
विशेषज्ञों
की
मदद
लेकर
स्थायी
मॉनिटरिंग
सिस्टम
तैयार
करना
चाहिए।कोर्ट
ने
यह
भी
कहा
कि
छात्रों
की
मेहनत
और
भावनाओं
को
देखते
हुए
उन्हें
ऐसे
मानसिक
तनाव
से
बचाना
बेहद
जरूरी
है।गौरतलब
है
कि
देशभर
में
3
मई
को
NEET-UG
परीक्षा
आयोजित
की
गई
थी।
7
मई
को
पेपर
लीक
की
खबर
सामने
आई
और
12
मई
को
परीक्षा
रद्द
कर
दी
गई।
अब
री-एग्जाम
21
जून
को
आयोजित
किया
जाएगा।
